मेरी पुस्तक "डॉ. प्रभांशु की कलम से: काव्य संग्रह" मेरा दूसरा काव्य संग्रह है। इस संग्रह की अधिकतर कविताएँ प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित है। मेरी कविताओं के कैनवास पर समाज के सभी रंग बोलते है। समय और समाजिक समकालीन विषयों से संवाद करती, मेरी कविताओं में समीकरण है, जोकि समाज का प्रतिबिंब है। मेरा काव्य संग्रह जहाँ एक ओर बचपन की यादें समेटे हुए हैं, तो वही दूसरी ओर इसमें श्रृंगार का वचन भी है।
अगर देखे तो मेरी कुछ रचनाएँ - "कूड़े वाला आदमी", "लेबर चौराहा" समाज के नीचे तबके के आदमी के जीवन को परिभाषित करती है । भारतीय संस्कृति का पुनः नवजागरण करती मेरी कुछ रचनाएँ- "ईश्वर कभी सोता नहीं है" "आस्था का कुंभ" से हमारी संस्कृति की महक सी आती है।
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