'ओह! प्रिय महेश्वरी' हास्य विनोद की भीनी बूँदों से भीगी एक परिवार की तीन पीढ़ियों की प्रेम कहानी है। जो प्रेम संग समाज में शिक्षा और नारी शक्ति का महत्व बताते हुए, समाज में मौजूद जातिवाद और कुरीतियों को भी दर्शाती है। साथ ही कहानी में मुख्य किरदार रोहिणी का अपने पिता और दादा के साथ अनूठा रिश्ता दिखाया गया है। जहाँ तीनों एक-दूसरे के साथ स्वतंत्र रूप से अपने भाव व्यक्त करते हैं साथ ही एक- दूसरे के सलाहकार भी बनते हैं। चाहे वाद शिक्षा से जुड़ा हो या विवाद प्रेम से। कहानी का मूल रूप काल्पनिक है जो बिहार की पृष्ठभूमि से भोजपुरी भाषा का कुछ रंग, कई रंगीन किरदारों और अंतरंगी घटनाओं को लिए काव्य रस की हल्की सी खुशबु के साथ प्रस्तुत है।
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