इस पुस्तिका की लेखिका धीरज जी का जन्म 8 अक्टूबर 1948 को हुआ था, इन्होंने अपनी प्रथम शिक्षा झरिया के. सी स्कूल तथा धनबाद महिला विद्यालय में प्राप्त की। बचपन से ही कहानियां पढ़ने का बहुत शौक था और वही शौक कब लिखने में बदल गया पता ही नहीं चला। जब समय मिलता लिखने बैठ जाती थी। उन्होंने इस पुस्तक में अपने अनुभव तथा संवेदना को व्यक्त किया है। उम्मीद है आप सबको यह कविता, कथा-कहानियां अपनी सी लगेंगी। धन्यवाद , दिल से आभार।
मैं लेखिका नहीं हूँ। फिर भी मैंने अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने की कोशिश की है। मैं अभी ७० वर्ष की हूँ। बचपन से ही मुझे पढ़ने-लिखने का शौक रहा है। और इसलिए मैं अपनी इच्छा पूरी करने जा रही हूँ। इस छोटी सी पुस्तिका के माध्यम से मैं अपने...