कहइ रीछपति सुनु हनुमाना. का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
पवन तनय बल पवन समाना. बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
कवन सो काज कठिन जग माहीं. जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं..
कोई उन्हें महाराज जी नीम करोरी कहता है, तो कोई महाराज जी नीम करोली के नाम से जानता है, तो कोई उन्हें महाराज जी नीब करोरी कहता है, तो कोई उन्हें महाराज जी के नाम से पुकारता है तो कोई महाराज जी जी के नाम से. महाराज जी नीम करोरी के देश विदेश में कई आश्रम है. महाराज जी के देश और विदेश में करोडो भक्त है. मेरा ये पुस्तक लिखने का उद्देश्य सिर्फ लोगो तक अपने साथ हुयी महाराज जी की कृपा से अवगत कराना था.
मै क्या हूँ और मेरी क्या क्षमता है !! जो महाराज जी की महानता और कृपा के बारे में कुछ लिखू !! मै बस वो लिख रहा हूँ...