यमधर्म के अंश से जनित, कुन्ती का प्रथम पुत्र था धर्मराज युधीष्ठिर। कष्टसहिष्णुता, शौर्यता और करुणा मूर्ति था युधिष्ठिर। अपने नाम के अनुसार वह धर्मप्रिय था और उसी मार्ग से चलकर सब के प्यार का पात्र था। जब कौरवों ने पाण्डवों को जूआ खेलने के लिए आमंत्रित किया तब धर्मराज ने अपनी पूरे संपत्ती, राज्य और पत्नी द्रौपदी को भी दाव पर लगादिया। वनवास की अवधी में यक्ष प्रश्नों के सही उत्तर देकर अपने भाईयों का प्राणों की रक्षा कि। महाभारत के युद्ध के पश्चात् ऋषि द्धैपायन के आज्ञा के अनुसार हस्तिनापुर राज्य को संभालकर एक आदर्श राजा प्रतीत हुआ।
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