'पृथा' कुंती का दूसरा नाम है। वह वसुदेव की छोटी बहन, श्रीकृष्ण की माता देवकी की मौसी थी। इसे राजा कुंतीभोज ने शूरराज की पुत्रि के रूप में गोद लिया था। उसने अपने विवाह से पूर्व महर्षि दूर्वास की सेवा अत्यंत निष्ठता पूर्वक किया और उसके बदले कई वरदान भी प्राप्त किया। इस के कारण वह किसी भी देवता का निमंत्रण करके अपनी इच्छा पूर्ण कर सकती थी। इस वरदान का परीक्षा करने की इच्छुकता से सूर्य देवता को आमंत्रित किया। उसके अंश से कर्ण का जन्म हुआ। परन्तु लोकापवाद के डर से उसने उस शिशु को एक पेटी में लिटाकर नदी में बहादिया। तत्पश्चाद् उसने पाण्डु से विवाह रचाया। विवाह के कई वर्ष बीतजानेपर भी उसे संतान प्राप्त नही हुआ, तब वह मंत्रो की महिमा से युद्धिठिर,...
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