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Title details for दुर्वास by Smt. T. N. Saraswati - Available

दुर्वास

ebook

महर्षि अत्रि-अनसूय दंपतियों से शिवजी की वरदान से जनित महर्षि दुर्वास है। कुंती की सेवा मनोभाव से आनंदित होकर उसे अनुग्रह किया। वे दर्योधन से प्रेरित होकर, पाण्डवों के आतित्य स्वीकार करने अपने दस हजार शिष्यों सहित पाण्डवों, के आश्रम में, द्रौपदी के भोजन के पश्चात चलेगये। पाण्डवों के पास एक अक्षय. पात्र था जो सूर्य देवता से उनको प्राप्त हूआ था। द्रौपदी के भोजन के पश्चात उस बरतन से कुछ नहीं निकलत था। ऐसे संकट की स्थिति में द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को प्रार्थन की और दुर्वास की क्रोधाग्नी से श्री कृष्ण ने पाण्डवों को बचाया।

Formats

  • Kindle Book
  • OverDrive Read
  • EPUB ebook

subjects

Languages

  • Hindi