श्री महाविष्णु के दस अवतारों मे एक है श्री परशुरामावतार । जमदग्नी और रेणुका के पुत्र परशुराम जन्म से ब्राह्मण थे पर क्षत्रिय गुणों से संपन्न थे। पिता जमदग्नी का एक क्षत्रिय राजा ने विनाकारण जब वध किया वे क्रोधित होकर सारे क्षत्रिय वंशजो संहार का संकल्प किया। इक्कीस बार उन्होंने भू प्रदक्षिणा की और क्षत्रियों का संहार किया। त्रेतायुग में श्री रामजी के साथ भी युद्ध किया और पराजित होकर तपस्या करने महेन्द्र पर्वत चलेगये। भीष्म पितामह इन के शिष्य थे। स दोनों युगों में दिखनेवाले परशुरामजी की चरित्र अत्यंत पावन हैं।
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