रावण का अनुज था विभीषण। वह एक दैवभक्त धर्मी पुरुष था। रावण सीतापहरण कर लंका लाने के पश्चात् वह उन्हें बहुत समझाने की प्रयत्न करता है। परन्तु रावण उसका भरी सभा में अपमान करता है। इससे दुखित विभीषण अपने कुछ साथियों के साथ लंका छोड़कर श्री राम के शरण में आजाता है जो उस समय लंका के बाहर अपने सैन्य समेत ठहरे थे। श्रीराम युद्ध प्रारंभ होने से पहले विभीषण को लंका की चक्रवर्ती घोषित कर के उसका राज्याभिषेक करते हैं। राम-रावण की युद्ध में विभीषण श्रीराम को कई प्रकार से सहायता करता है।
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