अगर आत्मविश्वास, ध्यैर्य और असाध्यकार्य को अपने मनोबलता और धृढ़ता से सिद्ध करना इसका काइे सही उदाहरण हैं तो वह ब्रम्हर्षि विश्वमित्र है। ब्रह्मर्षि वसिष्ठ से कामधेनु छीनने की कोशिश कर, असफल होकर वे घोर तपस्य करके ब्रम्हर्षि का पद प्राप्त किया। वसिष्ठ से प्रशंसित विश्वमित्र राजा त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेजने की योजना बनाते हैं। परंतु जब त्रिशंकु को धरती की ओर धक्खा देकर गिराया जाता है तब विश्वामित्र अपने तपोबल से नया स्वर्ग का निर्माणकरते हैं। इस तरह गायत्री मंत्र के प्रवर्तक विश्वामित्र के जीवन चरित्र सब को जानना और पढ़ना अत्यंत आवश्यक है।
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