जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है वैसे इतना ही रख सकती है इसके बावजूद भी हम इंसानों ने प्रकृति को इतना नुकसान पहुंचाया है कि उसकी हालत बहुत बुरी हो चुकी है अगर प्रकृति में भी बदला लेने की भावना होती तो वह कैसे लेती यही सोचकर प्रकृति का बदला कहानी लिखी गई है|
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