समीर - एक मिडिल क्लास युवा, जो बचपन से ही अपने पिता के सपनों का बोझ अपने कंधों पर लेकर चल रहा है और किसी भी कीमत पर अपने पिता का सपना पूरा करना चाहता है।
संध्या - जिसके पिता एक बड़े बिजनेसमैन हैं, उसने ज़िन्दगी में केवल सुख ही सुख देखा है। ज़िन्दगी के दूसरे पहलू से वो अंजान है।
जब संध्या समीर की जिंदगी में आती है तो उसकी ज़िन्दगी में उथल-पुथल शुरू हो जाती है। समीर जिंदगी की भूल-भुलैया में उलझता चला जाता है। एक ओर उसके पिता का सपना है, दूसरी तरफ संध्या है जो उसके लिए किसी पहेली की तरह है। क्या समीर इस सब में उलझ कर रह जायेगा या ज़िन्दगी उसे कहेगी 'गुडलक'।
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