भूमिका
बिना पढ़े आपके मन माफिक भूमिका लिखने में सिद्धहस्त तमाम पेशेवर भूमिका लेखकों को निराश करते हुए मैं बिना भूमिका के ही इस संग्रह को सीधे पाठकों तक जाने दे रहा हूँ।
वे ही इसे पढ़कर इसकी भूमिका लिखेंगे।
यूँ भूमिका लिखवाना आज मुश्किल नहीं रह गया। लेखन से चुके हुए बहुत से लोग भूमिका लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। बेचारे गाहे बगाहे लोगों को फोन कर पूछते रहते हैं "तुम्हारा जो संग्रह आने वाला था, उसका क्या हुआ? कब तक लाने का विचार है? भूमिका जरूर देना उसमें। भूमिका से किताब में जान आ जाती है। बिना भूमिका के किताब विधवा स्त्री की तरह लगती है। किसी न किसी से भूमिका जरूर लिखवा लेना। तुम्हें तो वैसे भी कोई मना नहीं करेगा, फिर भी कोई न मिले तो हम तो...