सात रंगों का अनुभव
जीवन के अर्थ और अनुभवों को ले कर कहानी का सृजन होता है। मैं भी इस अनुभव का अपवाद नहीं हूँ। एक तरफ नौकरी दूसरी ओर घर- संसार के जंजाल के बीच हृदय में सृजनात्मकता की छटपटाहट ही मेरा कथा संसार है। मेरे चारों ओर घूमते मनुष्यों का चरित्र ही मेरी कहानी का चरित्र है। इनमें व्याप्त शून्यभाव, अहंकार, त्याग, प्रेम, तीतीक्षा सब मेरे कथानक के अंश हैं।
कभी-कभी मैं इनके जीवन में स्वयं का अनुभव कर पाती हूँ। कभी इनके हृदय-दर्पण में मुझे अपना प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है। यही अनुभव कभी-कभी शब्दबद्ध होकर मेरे हृदय में उतर आता है। ऐसा लगता है- वे चरित्र, घटनाएँ मेरे द्वारा उकेरे जाने की अपेक्षा रखते हैं अन्यथा क्या मैं उन्हें लिपिबद्ध कर...