'सोच में क्या है, शीर्षक के माध्यम से अपने विचारभाव को विभिन्न प्रकार की सोच पर केंद्रित करते हुए ही इस पुस्तक के लेखन का प्रयास किया गया है।'सोच' एक ऐसा भाव है, जिसके माध्यम से सदैव ही कोई भी किसी भी विषय का मनन करते हुए एक निर्णायक स्थिति तक पहुंच सकता है। 'सोच' विषय पर इस बात का सदैव ही स्मरण रखा जाना चाहिए कि एक स्वस्थ सोच, स्वस्थ चिंतन व मनन से ही मनुष्य के चरित्र का एवं उसके भविष्य का निर्माण होता है।