अपनी इच्छा से प्राण त्यागानें की क्षमता रखने वाले भीष्म का एक और नाम देवव्रत है। वे राजा शंतनु और गंगा पुत्र थे। उन्होंने अपना सारा जीवन हस्तिनापुर साम्राज्य के उन्नती के लिए समर्पित किया कुरुवंशियों के मार्गदर्शक, भोदक, तत्वज्ञान के धनी वे आजीवनपर्यंत निष्ठा से सेवा किया। कुरुवंशजों के पितामह भीष्म अप्रतिम शूरवीर थे। अपनी माता सत्यवती को दिया वचनानुसार उन्होंने कभी विवाह नही किया और अपने भाईयों की विवाह के लिए राजकुमारी अंबा अंबिका और अंबालिका को ले आये। राजकुमारी अंबा भीष्म के सहोदर चित्रवीर्य और विचित्रवीर्य से विवाह करने से इनकार करती है। वह राजकुमार शाल्व से प्रेम करती थी परन्तु इस घटना के पश्चात् शाल्व ने भी उसे...
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