काव्य संग्रह "जलती मशाल" वास्तविक मेरे लिए एक स्वप्न लोक जैसा था क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक मैंने कभी विचार नहीं किया था कि मैं कभी कुछ लिख पाऊँगा,मेरी कोई काव्य संग्रह भी निकलेगी। मेरे मन में असीम संभावनाएं-जिज्ञासाएं उत्पन्न होती थी किंतु लेखन शैली का दूर-दूर तक कोई नाता नही था,न ही मेरे आस-पास में कोई ऐसे व्यक्ति थे जिनसे मैं कुछ सीख पाता या जिनसे कुछ दिशा-निर्देशन ले पाता। फिर वक्त के थपेड़ों ने मुझे इस कदर बदला कि आज कुछ न कुछ जरूर लिख लेता हूँ कोरोना काल में जब प्रथम लॉकडाउन लगा था जिसमें असंख्य लोग पैदल चलने को मजबूर हो गए थे उन्हीं को समर्पित मेरी पहली कविता रही और तब से लेकर आज तक इन दो वर्षों में मैंने अपनी जिंदगी में जितने भी समस्याएं...
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