स्वर्गविभा वेबसाईट पत्रिका, पिछले 19 सालों से हिंदी को अपनी धमक कायम रखने में, अग्रगामी भूमिका निभाती आ रही ही है| इस अंक के लिए संदेश देते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है| हमेशा की तरह पत्रिका का यह अंक भी समस्त विश्व को, हिंदी प्रेमियों, अनुसन्धानकर्त्ताओं एवं विद्वानों के विविध कहानियों, गज़लों, आलेखों से अवगत कराने का मार्ग प्रशस्त करेगा|
अनेक लेखकों एवं चिंतकों की रचनाओं को एकत्रित करना, उन्हें अंतिम रूप देकर, पत्रिका के अंकों में सम्मिलित करना, परम्परागत रूप से एक महत्वपूर्ण कार्य रहा| इस वर्ष, किन्हीं कारणवश यह कार्य अपेक्षाकृत बड़ा ही चुनौतीपूर्ण रहा| पर मुझे ख़ुशी है कि बावजूद स्वर्गविभा टीम इस अंक को प्रकाशित करने...