हनुमानजी देवी-देवताओं में चिरंजीवी हैं। शीघ्र प्रसन्न होनेवाले पवनपुत्र बल व बुद्धि के अनूठे संगम और हर तरह के संकट को हरनेवाले हैं। हनुमानजी का एक अर्थ है- निरहंकारी या अभिमानरहित। हनु का मतलब हनन करना और मान का मतलब अहंकार। अर्थात जिसने अपने अहंकार का हनन कर लिया हो। यह सभी को पता है कि हनुमानजी को कोई अभिमान नहीं था।
हनुमानजी अग्रणी रामभक्त हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि थी, जैसा कि रामायण में वर्णित है, बंदरों की सेना के अग्रणी के रूप में राक्षसराज रावण से लड़ाई। रामायण के अनुसार वे सीतामाता के अत्यधिक प्रिय हैं। इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी शामिल हैं। शेष छह ये हैं - परशुराम, विभीषण, महर्षि व्यास, कृपाचार्य, अश्वत्थामा और राजा बली। हनुमानजी का अवतार भगवान् राम की सहायता के लिए हुआ। हनुमानजी के पराक्रम की असंख्य गाथाएँ प्रचलित हैं। उन्होंने जिस तरह से राम के साथ सुग्रीव की मैत्री कराई और फिर वानरों की मदद से राक्षसां का मर्दन किया, वह अत्यंत प्रसिद्ध है।