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Title details for द्रौपदी by Sri Hari - Available

द्रौपदी

ebook

पाँचाल नरेश द्रुपद की पुत्री जो यज्ञ कुंड की मध्यभाग से जनित, कृष्णें, याज्ञसेनी, द्रौपदी, पाँचाली ऐसे कई नामों से प्रसिद्ध हुई। जब उसका जन्म हुआ तब आकाशवाणी हुई की "यह कौरवों के विनाश का कारण होगी। कौरवों को घोर विपदा सामना करना पडेगा।" स्वयंवर में अर्जुन विजय प्राप्त कर ने पर भी कुंती की सुझाव के अनुसार वह पाँचो पांडवों की पत्नी होगई। जब पाण्डव कौरवों के साथ जुआ में हारने पर, दुर्योधन के आदेशानुसार दुःशासन इसका वस्त्रापहरण करने लगा। परन्तु श्रीकृष्ण की कृपा से उसे अक्षय वस्त्र प्राप्त होता हैं। पर पाण्डवों को बारह वर्षों का वनवास और एक वर्षका अज्ञात वास के समय पर उसे अनेक कठिणाईयों का सामाना करना पड़ता है। फिर भी कौरवों के साथ युद्ध...

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  • Kindle Book
  • OverDrive Read
  • EPUB ebook

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Languages

  • Hindi