यह कुछ सत्य घटनाओं से प्रेरित एक काल्पनिक उपन्यास है।
अगली सुबह राजेश और लैला होटल के बाहर निकले। उन्होंने सोचा था बाहर निकल कर कोई टैक्सी कर लेंगे। वे मुश्किल से एक सौ कदम ही दूर चले होंगे कि उनके पीछे एक बड़ा धमाका हुआ। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा प्लाजा होटल लपटों में घिरा हुआ था । लोग यहाँ वहाँ भाग रहे थे। वे भी उस जगह से दूर भागने लगे । जाहिरा तौर पर एक सुरक्षित दूरी तक पहुँचने के बाद, वे थोड़ा सुस्ताने को रुके । पुलिस, सेना, और फायर ब्रिगेड के वाहन प्लाज़ा होटल की तरफ भाग रहे थे।(नाकाम दुश्मन से )