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Title details for Man Ke Do Mausam by Gajendra Shrotriya - Available

Man Ke Do Mausam

ebook

मिली तमाम वो शै जिनकी आरजू ही नहीं मेरे नसीब में सब कुछ है सिर्फ तू ही नहीं तेरी याद से दिल भरा तो रहेगा मगर ज़ीस्त में इक ख़ला तो रहेगा अधूरी रही क्यूँ मुहब्बत हमारी हमें ख़ुद से ही ये गिला तो रहेगा ये तबस्सुम लबो का झूठा है सच तो ये है कि दिल तो टूटा है जहाँ चैन था मेरी आवारगी को ये दिल याद करता है फिर उस गली को न दिल आने देता है दिल में किसी को करे कौन पूरी तुम्हारी कमी को तुझको भुलाना वैसे तो मुश्किल नहीं लगा लेकिन तेरे बग़ैर कहीं दिल नही लगा ख़ाली रहा ये दिल का मकाँ बाद में तेरे कोई भी इसमें रहने के क़ाबिल नहीं लगा इसी पुस्तक से

Formats

  • OverDrive Read
  • EPUB ebook

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Languages

  • Hindi